फ़ाइल सं. IJM-0010
वर्गीकरण: ऐतिहासिक अभिलेखागार
जोन ऑफ़ आर्क
Joan of Arc
सैन्य नेता एवं संत

खंड I -- व्यक्ति परिचय
| नाम | जोन ऑफ़ आर्क |
|---|---|
| अंग्रेज़ी | Joan of Arc |
| राष्ट्रीयता | फ्रांस |
| जीवनकाल | 1412–1431 |
| लिंग | महिला |
| शताब्दी | 11-15वीं सदी |
| क्षेत्र | सैन्य |
| पदवी | सैन्य नेता एवं संत |
खंड II -- सारांश
1412 में पूर्वी फ्रांस के छोटे गाँव दोमरेमी में एक किसान परिवार में जन्मी जोन का बचपन भेड़ें चराते, सिलाई करते और चर्च जाते हुए बीता।वे अनपढ़ थीं, परंतु अत्यंत धार्मिक — सौ वर्षीय युद्ध की तबाही उनके गाँव तक पहुँच चुकी थी और फ्रांस पराजय की कगार पर था।
पहला निर्णायक मोड़ 1428 के आसपास आया जब 13 वर्ष की आयु में उन्हें संत माइकल, संत कैथरीन और संत मार्गरेट की आवाज़ें सुनाई देने लगीं, जिन्होंने उन्हें फ्रांस को बचाने का आदेश दिया।कठिनाई से उन्होंने स्थानीय सैन्य कमांडर को प्रभावित किया और पुरुष वेश में राजकुमार चार्ल्स से मिलने चिनॉन पहुँचीं।
दूसरा मोड़ 1429 में आया जब मात्र 17 वर्ष की आयु में उन्होंने फ्रांसीसी सेना का नेतृत्व करते हुए ऑर्लियन्स की घेराबंदी को नौ दिनों में तोड़ दिया — यह असाधारण विजय सौ साल के युद्ध की धारा बदल गई।इसके बाद उन्होंने रैंस तक का रास्ता साफ़ किया और चार्ल्स सप्तम का राज्याभिषेक करवाया।
1430 में कॉम्पिएन में बरगंडियों ने उन्हें पकड़कर अंग्रेज़ों को बेच दिया।रूआन में विधर्म और पुरुष-वेश धारण के आरोपों में मुकदमा चला और 1431 में मात्र 19 वर्ष की आयु में जलाकर मार दी गईं।
1920 में कैथोलिक चर्च ने उन्हें संत घोषित किया और वे फ्रांस की संरक्षक संत बनीं।
खंड III -- कालरेखा
खंड IV -- प्रसिद्ध कथन
“मुझे ईश्वर ने भेजा है। तुम मेरा न्याय नहीं कर सकते।”
“कर्म करो, और ईश्वर कर्म करेगा।”
खंड V -- फ़ील्ड नोट्स
[A]सबसे कम उम्र की सैन्य कमांडर
जोन ने मात्र 17 वर्ष की आयु में सेना का नेतृत्व किया। बिना किसी औपचारिक सैन्य प्रशिक्षण के, उन्होंने सैनिकों का मनोबल नाटकीय रूप से बढ़ाया और लगातार हार झेल रही फ्रांसीसी सेना को विजय दिलाई। उनकी उपस्थिति ही एक रणनीतिक हथियार थी।
जोन ऑफ़ आर्क के संक्षिप्त लेकिन असाधारण सैन्य कैरियर ने सौ साल के युद्ध की दिशा बदल दी और फ्रांसीसी राजशाही को सुरक्षित किया। उनका मुक़दमा और फाँसी धार्मिक उत्पीड़न और राजनीतिक अन्याय का प्रतीक बन गई। 1920 में संत घोषित, वे फ्रांस की संरक्षक संत और साहस, विश्वास और राष्ट्रीय पहचान का स्थायी प्रतीक बनी हुई हैं।
- [01]ऑरलियन्स की मुक्ति (1429)
- [02]रेम्स में चार्ल्स सप्तम का राज्याभिषेक (1429)
- [03]लोइरे अभियान की विजय (1429)
- [04]कॉम्पिएन की रक्षा (1430)
- [05]रूएन में मुक़दमे की प्रतिलिपि (1431)


