फ़ाइल सं. IJM-0013
वर्गीकरण: ऐतिहासिक अभिलेखागार
वुल्फगांग अमाडेउस मोत्सार्ट
Wolfgang Amadeus Mozart
संगीतकार

खंड I -- व्यक्ति परिचय
| नाम | वुल्फगांग अमाडेउस मोत्सार्ट |
|---|---|
| अंग्रेज़ी | Wolfgang Amadeus Mozart |
| राष्ट्रीयता | ऑस्ट्रिया |
| जीवनकाल | 1756–1791 |
| लिंग | पुरुष |
| शताब्दी | 16-18वीं सदी |
| क्षेत्र | संगीत |
| पदवी | संगीतकार |
खंड II -- सारांश
1756 में ऑस्ट्रिया के साल्ज़बर्ग में दरबारी संगीतकार लिओपोल्ड मोत्सार्ट के घर जन्मे वुल्फगांग ने तीन वर्ष की आयु में पियानो बजाना और पाँच में रचनाएँ करना शुरू कर दिया।उनकी असाधारण श्रवण-स्मृति ऐसी थी कि जटिल रचनाओं को केवल एक बार सुनकर पूरी तरह दोहरा सकते थे।
पहला मोड़ 1762 में तब आया जब उनके पिता ने छह वर्षीय बालक को बहन नान्नेर्ल के साथ यूरोप के दरबारों में प्रस्तुत करना शुरू किया — म्यूनिख, वियना, पेरिस, लंदन और रोम की दस वर्षीय यात्राओं ने उन्हें बाल प्रतिभा की वैश्विक ख्याति दिलाई।किशोरावस्था में वे साल्ज़बर्ग के आर्चबिशप के सेवा में संगीतकार बने, परंतु यह नौकरी उनकी रचनात्मक स्वतंत्रता के लिए बहुत संकुचित थी।
दूसरा निर्णायक मोड़ 1781 में आया जब 25 वर्ष की आयु में उन्होंने साल्ज़बर्ग छोड़कर वियना में स्वतंत्र संगीतकार के रूप में अपना जीवन शुरू किया — यह उस युग में अत्यंत साहसिक निर्णय था।कॉन्स्टांज़ वेबर से विवाह किया और अगले दशक में 「द मैरिज ऑफ फिगारो」, 「डॉन जियोवानी」 तथा 「द मैजिक फ्लूट」 जैसी क्रांतिकारी ओपेरा रचीं, जिन्होंने इस विधा को कुलीन मनोरंजन से गहरे मानवीय नाटक में बदल दिया।
आर्थिक संकट और अधिक परिश्रम से कमज़ोर होकर 1791 में मात्र 35 वर्ष की आयु में वियना में निधन हुआ — उनकी अधूरी 「रिक्वियम」 आज भी उनके असामयिक अंत की मार्मिक स्मृति है।
खंड III -- कालरेखा
खंड IV -- प्रसिद्ध कथन
“संगीत स्वरों में नहीं, बल्कि उनके बीच की नीरवता में है।”
“न उच्च बुद्धिमत्ता, न कल्पना, न दोनों मिलकर प्रतिभा बनाते हैं।”
खंड V -- फ़ील्ड नोट्स
[A]पाँच वर्ष की आयु में संगीत रचना
मोत्सार्ट ने पाँच वर्ष की आयु में अपनी पहली रचना की और कथित तौर पर जटिल रचनाओं को केवल एक बार सुनकर पूरी तरह दोहरा सकते थे। उनकी असाधारण स्मृति और संगीत प्रतिभा ने बचपन से ही सभी को चकित कर दिया।
मोत्सार्ट के संगीत ने रूप, माधुर्य और भावनात्मक गहराई के अपने पूर्ण संतुलन के साथ शास्त्रीय रचना का मानक स्थापित किया। उनके ओपेरा ने इस विधा को कुलीन मनोरंजन से गहरे मानवीय नाटक में बदल दिया, और बीथोवन से लेकर त्चैकोव्स्की तक के बाद के संगीतकारों पर उनका प्रभाव अपरिमेय है। उनकी कृतियाँ दुनिया भर में शास्त्रीय भंडार में सबसे अधिक प्रदर्शन की जाने वाली बनी हुई हैं।
- [01]द मैरिज ऑफ़ फिगारो (1786)
- [02]डॉन जियोवानी (1787)
- [03]द मैजिक फ़्लूट (1791)
- [04]डी माइनर में रिक्विम, K.626 (1791, अधूरा)
- [05]सिम्फनी संख्या 41 「ज्यूपिटर」 (1788)
