फ़ाइल सं. IJM-0027
वर्गीकरण: ऐतिहासिक अभिलेखागार
मैरी आंत्वानेत
Marie Antoinette
फ्रांस की रानी

खंड I -- व्यक्ति परिचय
| नाम | मैरी आंत्वानेत |
|---|---|
| अंग्रेज़ी | Marie Antoinette |
| राष्ट्रीयता | फ्रांस |
| जीवनकाल | 1755–1793 |
| लिंग | महिला |
| शताब्दी | 16-18वीं सदी |
| क्षेत्र | राजनीति |
| पदवी | फ्रांस की रानी |
खंड II -- सारांश
1755 में वियना में ऑस्ट्रिया की साम्राज्ञी मारिया थेरेज़ा की पंद्रहवीं संतान के रूप में जन्मी मैरी आंत्वानेत का बचपन हब्सबर्ग दरबार के वैभव में बीता, परंतु उनकी शिक्षा पर बहुत कम ध्यान दिया गया — वे संगीत, नृत्य और फ्रेंच में कुशल थीं किंतु गंभीर अध्ययन से वंचित रहीं।पहला निर्णायक मोड़ 1770 में आया जब मात्र 14 वर्ष की आयु में उन्हें फ्रांस-ऑस्ट्रिया गठबंधन को मज़बूत करने के लिए फ्रांसीसी युवराज लुई ऑगस्त से विवाह कर दिया गया और वियना से सदा के लिए विदा ले लेना पड़ा।
फ्रांसीसी दरबार की कठोर औपचारिकताएँ, विदेशी होने का ताना और पति की भावनात्मक दूरी — सब कुछ उन्हें वर्साय में अलग-थलग महसूस कराता।1774 में लुई सोलहवें के सिंहासन पर बैठते ही वे 18 वर्ष की आयु में फ्रांस की रानी बनीं।
राजनीति से उदासीन रहकर उन्होंने पेटिट ट्रिआनोन में एक काल्पनिक हैमलेट बनवाया, फ़ैशन, जुआ, और गेंदबाज़ी समारोहों में डूब गईं — जनता ने उन्हें 「मादाम डेफ़िसिट」 कहना शुरू कर दिया।1785 के हीरों के हार कांड ने उनकी प्रतिष्ठा को गहरा आघात पहुँचाया, हालाँकि वे निर्दोष थीं।
दूसरा और त्रासद मोड़ 1789 में आया जब बास्तील पर हमले से फ्रांसीसी क्रांति शुरू हुई और शाही परिवार को तुइलरी में बंदी बनाया गया।1791 में वारेन्स भागने का असफल प्रयास उनके विरुद्ध आख़िरी सबूत बना।
अगस्त 1792 में राजशाही का अंत हुआ और जनवरी 1793 में लुई सोलहवें को फाँसी दी गई।अक्टूबर 1793 में क्रांतिकारी न्यायाधिकरण के झूठे आरोपों के बाद 37 वर्ष की आयु में उन्हें पेरिस के कॉन्कोर्ड स्क्वायर पर गिलोटिन पर चढ़ा दिया गया।
खंड III -- कालरेखा
खंड IV -- प्रसिद्ध कथन
“साहस! मैंने इसे कई वर्षों तक दिखाया है। क्या आपको लगता है कि मैं उस क्षण इसे खो दूँगी जब मेरी पीड़ा समाप्त होगी?”
खंड V -- फ़ील्ड नोट्स
[A]「केक खा लो」: एक झूठा कथन
उन्हें「ब्रिओश खा लो」कहने का श्रेय दिया जाता है जब उन्हें बताया गया कि गरीबों के पास रोटी नहीं है। लेकिन इतिहासकार पुष्टि करते हैं कि उन्होंने यह कभी नहीं कहा। यह कथन क्रांति के दौरान उनके विरुद्ध प्रचार अभियान का हिस्सा था।
मैरी आंत्वानेत का जीवन और फाँसी राजशाही की अधिकता और क्रांति के हिंसक परिणामों का एक शक्तिशाली प्रतीक बन गया। उनके मुक़दमे और मृत्यु ने फ्रांसीसी क्रांति की दिशा को परिभाषित करने में मदद की और न्याय, राजशाही और लोकप्रिय संप्रभुता के बारे में बहसों को प्रभावित किया जो आज भी जारी हैं। फ़िल्म, साहित्य और कला में अनगिनत चित्रणों के माध्यम से उनका सांस्कृतिक प्रभाव बना हुआ है।
- [01]वर्साय में कला का संरक्षण
- [02]पेटिट ट्रिआनोन हैमलेट का निर्माण
- [03]हीरे का हार मामला (1785, सार्वजनिक घोटाला)
- [04]क्रांतिकारी न्यायाधिकरण के समक्ष मुक़दमे की गवाही (1793)
- [05]मैडम एलिज़ाबेथ को अंतिम पत्र (1793)



