अवर्गीकृत
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फ़ाइल सं. IJM-0040

वर्गीकरण: ऐतिहासिक अभिलेखागार

प्लेटो

Plato

दार्शनिक और अकादमी के संस्थापक

प्लेटो

खंड I -- व्यक्ति परिचय

नामप्लेटो
अंग्रेज़ीPlato
राष्ट्रीयताग्रीस
जीवनकाललगभग 428–348 ई.पू.
लिंगपुरुष
शताब्दीईसा पूर्व
क्षेत्रदर्शन
पदवीदार्शनिक और अकादमी के संस्थापक

खंड II -- सारांश

लगभग 428 ईसा पूर्व एथेंस के एक कुलीन अरिस्टोक्रेटिक परिवार में जन्मे प्लेटो का असली नाम अरिस्टोक्लीज़ था, परंतु उनके चौड़े कंधों या विस्तृत शैली के कारण 「प्लातोन」 (चौड़ा) नाम पड़ा।पिता एरिस्टॉन एथेंस के प्रारंभिक राजाओं के वंशज माने जाते थे और माँ पेरिक्टिओन विधायक सोलोन के परिवार से थीं — इस राजनीतिक कुलीनता ने उनके जीवन का मार्ग तय किया।

युवावस्था में उन्होंने कुश्ती, कविता और चित्रकला में प्रतिष्ठा पाई, और अपने वर्ग के अनुरूप राजनीतिक करियर की योजना बनाई।पहला और निर्णायक मोड़ लगभग 20 वर्ष की आयु में आया जब वे सुकरात के शिष्य बने — वृद्ध दार्शनिक की संवाद-पद्धति और नैतिक गहराई ने प्लेटो को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने अपनी काव्य-रचनाएँ जला दीं और स्वयं को दर्शन के लिए समर्पित कर दिया।

अगले आठ वर्ष सुकरात के साथ बिताए।399 ईसा पूर्व में उनके गुरु को एथेनियन लोकतंत्र द्वारा हेमलॉक पीकर मृत्युदंड दिया गया — इस अन्याय ने 29 वर्षीय प्लेटो को आजीवन लोकतंत्र के प्रति संदेही बना दिया और उन्होंने आदर्श शासन की खोज के लिए दर्शन को चुना।

अगले 12 वर्ष उन्होंने मेगारा, मिस्र, साइरीन और दक्षिणी इटली की यात्रा की, जहाँ पायथागोरियन गणितीय दर्शन से प्रभावित हुए।सिराक्यूज़ के अत्याचारी डायोनिसियस के दरबार में दार्शनिक-राजा बनाने का प्रयास विफल रहा और वे बंदी बनाकर बेच दिए गए, परंतु एक मित्र ने मुक्त कराया।

दूसरा ऐतिहासिक मोड़ लगभग 387 ईसा पूर्व में आया जब वे एथेंस लौटकर नायक अकादमोस के उपवन में अपनी 「अकादमी」 स्थापित की — पश्चिमी दुनिया का पहला उच्च शिक्षा संस्थान जो लगभग 900 वर्षों तक चला।अरस्तू यहाँ 20 वर्ष उनके शिष्य रहे।

अगले चालीस वर्षों में उन्होंने लगभग तीस संवाद लिखे — 「सुकरात की क्षमायाचना」, 「फ़ीडो」, 「संगोष्ठी」, और शिखर कृति 「गणतंत्र」 जिसमें गुफ़ा का दृष्टांत, प्रारूपों का सिद्धांत और दार्शनिक-राजा की अवधारणा प्रस्तुत की।348 ईसा पूर्व में एक विवाह भोज में लगभग 80 वर्ष की आयु में निधन हुआ।

खंड III -- कालरेखा

लगभग 428 ई.पू.एथेंस या एजिना में जन्म
लगभग 407 ई.पू.सुकरात के शिष्य बने
399 ई.पू.सुकरात को मृत्युदंड जिसने उन्हें गहराई से प्रभावित किया
लगभग 387 ई.पू.एथेंस में अकादमी की स्थापना
लगभग 375 ई.पू.「गणतंत्र」संवाद लिखा
लगभग 348 ई.पू.एथेंस में निधन (लगभग 80 वर्ष)

खंड IV -- प्रसिद्ध कथन

ज्ञान की शुरुआत विस्मय से होती है।

दयालु बनो, क्योंकि हर व्यक्ति जिससे तुम मिलते हो एक कठिन लड़ाई लड़ रहा है।

खंड V -- फ़ील्ड नोट्स

[A]गुफा का रूपक

अपने सबसे प्रसिद्ध दार्शनिक रूपक में, प्लेटो ने एक गुफा में बँधे कैदियों का वर्णन किया जो केवल दीवार पर छायाएँ देखते हैं और उन्हीं को वास्तविकता मानते हैं। जब एक कैदी मुक्त होकर सूर्य देखता है तो उसे ज्ञात होता है कि जो कुछ वह देख रहा था वह मात्र भ्रम था। यह रूपक दार्शनिक की अज्ञान से सच्चे ज्ञान तक की यात्रा का प्रतिनिधित्व करता है।

प्लेटो के दार्शनिक लेखन ने पश्चिमी तत्वमीमांसा, ज्ञानमीमांसा और राजनीतिक सिद्धांत के लिए ढाँचा स्थापित किया। उनकी अकादमी, पश्चिमी दुनिया में उच्च शिक्षा का पहला संस्थान, लगभग 900 वर्षों तक संचालित हुई। प्रारूपों का सिद्धांत, गुफ़ा का दृष्टांत, और रिपब्लिक दुनिया भर के दर्शनशास्त्र पाठ्यक्रमों में केंद्रीय पाठ बने हुए हैं, और 「प्लेटोनिक」 शब्दांश रोज़मर्रा की भाषा में प्रवेश कर चुका है।

  • [01]द रिपब्लिक (लगभग 380 ईसा पूर्व)
  • [02]द सिम्पोज़ियम (लगभग 385 ईसा पूर्व)
  • [03]सुकरात की क्षमायाचना (लगभग 399 ईसा पूर्व)
  • [04]फ़ीडो (लगभग 360 ईसा पूर्व)
  • [05]अकादमी की स्थापना (लगभग 387 ईसा पूर्व)

खंड VI -- संदर्भ सामग्री

फ़ाइल समाप्त -- IJM-0040पृष्ठ 1 / 1