फ़ाइल सं. IJM-0042
वर्गीकरण: ऐतिहासिक अभिलेखागार
कार्ल मार्क्स
Karl Marx
दार्शनिक, अर्थशास्त्री और सामाजिक सिद्धांतकार

खंड I -- व्यक्ति परिचय
| नाम | कार्ल मार्क्स |
|---|---|
| अंग्रेज़ी | Karl Marx |
| राष्ट्रीयता | जर्मनी |
| जीवनकाल | 1818–1883 |
| लिंग | पुरुष |
| शताब्दी | 19वीं सदी |
| क्षेत्र | दर्शन |
| पदवी | दार्शनिक, अर्थशास्त्री और सामाजिक सिद्धांतकार |
खंड II -- सारांश
1818 में प्रशिया के ट्रियर शहर में एक सम्मानित यहूदी परिवार में जन्मे कार्ल मार्क्स के वंशजों में पीढ़ियों से रब्बी रहे थे, परंतु उनके वकील पिता हेनरिक ने व्यावसायिक प्रतिबंधों से बचने के लिए ईसाई धर्म अपना लिया था।प्रबुद्धता आदर्शों से भरा घरेलू वातावरण उन्हें मिला।
वे बॉन विश्वविद्यालय में कानून पढ़ने गए परंतु शराब और द्वंद्वयुद्ध में उलझ गए, जिससे पिता ने उन्हें अनुशासित बर्लिन विश्वविद्यालय भेजा, जहाँ वे हेगेल के दर्शन में डूब गए और 「यंग हेगेलियन」 समूह से जुड़े।पहला निर्णायक मोड़ 1841 में आया जब उन्होंने येना विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में डॉक्टरेट पूरी की, परंतु उनके कट्टरपंथी विचारों के कारण कोई विश्वविद्यालय नौकरी नहीं मिली।
इसके बजाय कोलोन में 「राइनिशे ज़ाइटुंग」 के संपादक बने, जहाँ सेंसरशिप से टकराव के कारण 1843 में अख़बार बंद कर दिया गया।उसी वर्ष उन्होंने बचपन की प्रेमिका जेनी वॉन वेस्टफ़ालेन से विवाह किया और पेरिस चले गए, जहाँ उन्होंने सर्वहारा क्रांति का विचार विकसित किया और अपने आजीवन सहयोगी फ्रेडरिक एंगेल्स से मिले — एक धनी कारखाना-मालिक का पुत्र जिसने मैनचेस्टर में श्रमिक वर्ग की भयावह स्थितियों का अवलोकन किया था।
निर्वासित होकर ब्रसेल्स गए, और दूसरा ऐतिहासिक मोड़ 1848 में आया जब एंगेल्स के साथ 「कम्युनिस्ट घोषणापत्र」 प्रकाशित किया — 「अब तक के सभी समाजों का इतिहास वर्ग संघर्ष का इतिहास है」।इसी वर्ष पूरे यूरोप में क्रांतियाँ फूट पड़ीं और मार्क्स को कई देशों से निष्कासित किया गया।
1849 में अंततः वे लंदन में बसे, जहाँ अगले 30 वर्ष अत्यंत ग़रीबी में बिताए — तीन बच्चे बाल्यावस्था में मर गए — केवल एंगेल्स के वित्तीय समर्थन से ब्रिटिश म्यूज़ियम के पठन कक्ष में बैठकर उन्होंने अपनी महाकृति रची।1864 में प्रथम इंटरनेशनल की स्थापना की और 1867 में 「दास कैपिटल」 का पहला खंड प्रकाशित हुआ जिसमें पूँजीवाद की वैज्ञानिक आलोचना दी।
1883 में लंदन में 64 वर्ष की आयु में निधन हुआ — अंत्येष्टि में मात्र 11 लोग थे, परंतु उनके विचारों ने 20वीं सदी के राजनीतिक मानचित्र को नया आकार दिया।
खंड III -- कालरेखा
खंड IV -- प्रसिद्ध कथन
“दार्शनिकों ने दुनिया की केवल विभिन्न प्रकार से व्याख्या की है, लेकिन असल बात इसे बदलना है।”
“दुनिया के मज़दूरों, एक हो जाओ! तुम्हारे पास खोने को अपनी ज़ंजीरों के सिवा कुछ नहीं है।”
खंड V -- फ़ील्ड नोट्स
[A]अर्थशास्त्री की ग़रीबी
अर्थशास्त्र और पूँजी पर विस्तृत लेखन के बावजूद, मार्क्स अपने जीवन का अधिकांश भाग लंदन में अत्यंत ग़रीबी में बिताया। वे आर्थिक रूप से अपने मित्र एंगेल्स पर निर्भर थे जो एक कारखाने के मालिक थे। उनके सिद्धांतों और उनकी वास्तविकता के बीच यह विरोधाभास उनके आलोचकों की नज़र से नहीं छूटा।
मार्क्स की पूँजीवाद की आलोचना और ऐतिहासिक भौतिकवाद का उनका सिद्धांत समाजवादी और साम्यवादी आंदोलनों के लिए बौद्धिक नींव बना जिसने 20वीं सदी के राजनीतिक मानचित्र को नया आकार दिया। चाहे उसे अपनाया गया हो या अस्वीकार किया गया हो, वर्ग संघर्ष, श्रम शोषण, और आर्थिक असमानता का उनका विश्लेषण आज भी अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, और राजनीति विज्ञान में बहसों के केंद्र में बना हुआ है।
- [01]दास कैपिटल, खंड 1 (1867)
- [02]साम्यवादी घोषणापत्र (एंगेल्स के साथ, 1848)
- [03]लुई बोनापार्ट का अठारहवाँ ब्रूमेर (1852)
- [04]ग्रंड्रीसे (आर्थिक पांडुलिपियाँ, 1857-1858)
- [05]राजनीतिक अर्थव्यवस्था की आलोचना में योगदान (1859)



