फ़ाइल सं. IJM-0050
वर्गीकरण: ऐतिहासिक अभिलेखागार
सैफ़ो
Sappho
गीत-कवयित्री
खंड I -- व्यक्ति परिचय
| नाम | सैफ़ो |
|---|---|
| अंग्रेज़ी | Sappho |
| राष्ट्रीयता | यूनान |
| जीवनकाल | लगभग 630–लगभग 570 ईसा पूर्व |
| लिंग | महिला |
| शताब्दी | ईसा पूर्व |
| क्षेत्र | साहित्य |
| पदवी | गीत-कवयित्री |
खंड II -- सारांश
सैफ़ो का जन्म लगभग 630 ईसा पूर्व में एजियन सागर में स्थित यूनानी द्वीप लेस्बोस पर हुआ — संभवतः एरेसोस या मिटिलीन शहर में — एक धनी अभिजात परिवार में।उनके पिता स्कैमांड्रोनिमोस एक धनी व्यापारी थे जो उनके छह वर्ष की आयु में मर गए, और उनकी माँ क्लेइस और तीन भाइयों को छोड़ गए।
उन्हें उस युग की स्त्रियों के लिए दुर्लभ एक उच्चस्तरीय शिक्षा मिली, जिसमें कविता, संगीत, नृत्य और सात-तारा वीणा (लायर) वादन शामिल थे।वे यूनानी गीतकाव्य के स्वर्ण युग में रहीं, जब लेस्बोस एक फलते-फूलते सांस्कृतिक केंद्र के रूप में था।
पहला निर्णायक मोड़ लगभग 600 ईसा पूर्व में आया जब मिटिलीन में राजनीतिक अशांति के कारण उन्हें सिसिली निर्वासित किया गया, फिर वे अपने द्वीप लौटीं और युवा लड़कियों का एक समूह बनाया जिन्हें वे कविता, संगीत और नृत्य की कला सिखाती थीं — संभवतः प्रेम की देवी अफ़्रोदिते और कला-म्यूज़ देवियों के संरक्षण में।परंपरा के अनुसार उन्होंने एंड्रोस द्वीप के केर्कोलास नामक एक धनी व्यक्ति से विवाह किया और अपनी माँ के नाम पर क्लेइस नाम की एक बेटी को जन्म दिया, परंतु पति की शीघ्र मृत्यु हो गई।
दूसरा मोड़ एक नए काव्य-रूप「सैफ़िक श्लोक」 (चतुष्पदी) के आविष्कार और गहरी संवेदनात्मक गीति-कविताएँ लिखने के साथ आया, जो भावना, प्रेम, सौंदर्य, ईर्ष्या और बुढ़ापे को ऐसी स्पष्टता से संबोधित करती थीं जो पश्चिमी साहित्य में पहले अज्ञात थी।उन्होंने अपनी कविताओं में अफ़्रोदिते, अपने भाइयों, बेटियों और अपने समूह की सहेलियों को संबोधित किया, सरल परंतु मनोवैज्ञानिक गहराई से भरी प्रत्यक्ष भाषा में।
उनकी कविताएँ बाद में अलेक्ज़ांड्रिया के पुस्तकालय में नौ पुस्तकों में संकलित हुईं जिनमें लगभग दस हज़ार पंक्तियाँ थीं, परंतु हमें केवल एक पूरी कविता («अफ़्रोदिते के लिए स्तोत्र») और बिखरे हुए टुकड़े मिले हैं, जिनमें से कुछ मिस्र के पपीरस पर हाल ही में खोजे गए हैं।प्लेटो ने उन्हें「दसवीं म्यूज़」कहा, नौ म्यूज़ देवियों में उन्हें जोड़ते हुए।
उनकी मृत्यु की परिस्थितियाँ अज्ञात हैं, हालाँकि एक बाद की किंवदंती है कि उन्होंने फ़ाओन नामक एक मछुआरे के प्रति निराशाजनक प्रेम के कारण लेउकास की चट्टान से छलांग लगाई — परंतु यह परवर्ती कहानी आधारहीन है।लगभग 570 ईसा पूर्व में लगभग 60 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ।
खंड III -- कालरेखा
खंड IV -- प्रसिद्ध कथन
“कुछ कहते हैं घुड़सवारों की सेना, कुछ पैदल सेना, कुछ नौसेना, काली पृथ्वी पर सबसे सुंदर है, परंतु मैं कहती हूँ वह है जिसे कोई प्रेम करता है।”
“कोई किसी अन्य समय में भी, मैं कहती हूँ, हमें याद रखेगा।”
खंड V -- फ़ील्ड नोट्स
[A]दसवीं म्यूज़
उनकी मृत्यु के दो शताब्दी बाद दार्शनिक प्लेटो ने एक प्रसिद्ध एपिग्राम लिखा जिसमें कहा:「कुछ कहते हैं नौ म्यूज़ हैं, कितने मूर्ख हैं! लेस्बोस की सैफ़ो को देखो — वह दसवीं है」। इस उपाधि ने उन्हें शास्त्रीय युग में लगभग दैवीय स्थान दिया, और लेस्बोस द्वीप को स्त्री-रचनात्मकता और स्त्रियों के बीच प्रेम का प्रतीक बनाया — जिससे बाद में अंग्रेज़ी शब्द «लेस्बियन» व्युत्पन्न हुआ।
अपनी अधिकांश कविता के खो जाने के बावजूद, सैफ़ो को पश्चिमी इतिहास की महानतम गीत-कवयित्री माना जाता है, और शास्त्रीय युग की कुछ ज्ञात महिलाओं में से एक। उन्होंने सैफ़िक श्लोक का आविष्कार किया जिसका उपयोग रोमन कातुलुस से आधुनिक कवियों तक ने किया। वे प्रेम और स्त्री-कविता का प्रतीक और आधुनिक नारीवादी काव्य आंदोलनों की प्रेरणा बनी रहीं।
- [01]अफ़्रोदिते के लिए स्तोत्र (जीवित एकमात्र पूर्ण कविता)
- [02]खंड 16 («कुछ कहते हैं घुड़सवारों की सेना»)
- [03]खंड 31 («मुझे वह पुरुष देवताओं के समान लगता है»)
- [04]खंड 168B (चंद्रमा और प्लीएडेस की कविता)
- [05]विवाह-गीत (एपिथालामिया)



